किन्नौर जिले के टापरी में मुख्यमंत्री ने भू-तापीय ऊर्जा आधारित फल सुखाने की इकाई का निरीक्षण किया
दो वर्षों में 16,963 किलोग्राम फल किए गए प्रसंस्कृत
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज एवं फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह 1,000 टन क्षमता वाली सुविधा एचपीएमसी और आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस इकाई में कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, जबकि 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रसंस्कृत किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध होगी।
इस प्रणाली के अन्तर्गत फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊष्मा का उपयोग किया जाता है।
यह क्षेत्र सबसे गर्म तापीय जलस्रोत के लिए भी जाना जाता है। बिजली पर निर्भर पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत, यह इकाई फल सुखाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग करती है और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों में एक नया मानक स्थापित करती है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
दो वर्षों में 16,963 किलोग्राम फल किए गए प्रसंस्कृत
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज किन्नौर जिले के टापरी में स्थापित विश्व की पहली भू-तापीय ऊर्जा संचालित सेब कोल्ड स्टोरेज एवं फल सुखाने की संयुक्त इकाई का निरीक्षण किया। यह 1,000 टन क्षमता वाली सुविधा एचपीएमसी और आइसलैंड की एक कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस इकाई में कुल 16,963 किलोग्राम फलों का प्रसंस्करण किया गया है। इनमें से 5,105 किलोग्राम फल नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच, जबकि 11,948 किलोग्राम फल जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच प्रसंस्कृत किए गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह सुविधा स्थानीय लोगों के लिए और अधिक लाभकारी सिद्ध होगी।
इस प्रणाली के अन्तर्गत फलों के भंडारण और सुखाने के लिए भू-तापीय ऊष्मा का उपयोग किया जाता है।
यह क्षेत्र सबसे गर्म तापीय जलस्रोत के लिए भी जाना जाता है। बिजली पर निर्भर पारंपरिक प्रणालियों के विपरीत, यह इकाई फल सुखाने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग करती है और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों में एक नया मानक स्थापित करती है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
Bijender Sharma*, Press Correspondent Bohan Dehra Road JAWALAMUKHI-176031, Kangra HP(INDIA)*
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