हमीरपुर के अजय शर्मा का दावा: न्यूटन के 340 साल पुराने तीसरे नियम में संशोधन का प्रस्ताव, अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ शोध
उपशीर्षक:
44 वर्षों के स्वतंत्र शोध के बाद पूर्व सहायक निदेशक शिक्षा ने रखा नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण; प्रयोगात्मक सत्यापन के लिए केंद्र और हिमाचल सरकार से सहयोग की अपील
हमीरपुर।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध क्षेत्र के निवासी एवं शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त पूर्व सहायक निदेशक अजय शर्मा ने विश्वभर में पढ़ाए जाने वाले न्यूटन के तीसरे गति नियम (Newton's Third Law of Motion) के संशोधन (Generalization) का दावा किया है। उनका शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं (रिसर्च जर्नल्स) और सम्मेलन कार्यवाहियों (Conference Proceedings) में प्रकाशित हो चुका है।
न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि "प्रत्येक क्रिया की बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" अजय शर्मा का कहना है कि यह नियम केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही पूरी तरह लागू होता है। उनके अनुसार, हर स्थिति में प्रतिक्रिया का परिमाण क्रिया के बराबर होना आवश्यक नहीं है, बल्कि कई परिस्थितियों में प्रतिक्रिया केवल क्रिया के समानुपाती (Proportional) होती है।
44 वर्षों से कर रहे हैं स्वतंत्र शोध
अजय शर्मा पिछले लगभग 44 वर्षों से इस विषय पर स्वतंत्र रूप से शोध कर रहे हैं। वे मार्च 2021 में शिक्षा विभाग में पूर्व सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वे डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में भौतिकी (Physics) का अध्यापन भी कर चुके हैं।
उनका कहना है कि उनके शोध पत्रों की विशेषज्ञों द्वारा पीयर रिव्यू (Peer Review) के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं एवं सम्मेलनों में प्रकाशित किया गया है। उनका दावा है कि उनके प्रस्तावित संशोधन से न्यूटन के लगभग 340 वर्ष पुराने सिद्धांत का विस्तार (Generalization) किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान
अजय शर्मा के अनुसार उनके शोध पत्र हाल ही में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड फिजिक्स (IUPAP) की कार्यवाही (Proceedings) में प्रकाशित हुए और उन्हें आईआईटी रोपड़ में प्रस्तुत किया गया। इससे पहले उनके शोध Elsevier द्वारा प्रकाशित Science Talks सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रकाशित हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त उनके शोध Physics Education (Indian Association of Physics Teachers), Physics Essays (Canada) तथा अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए हैं। उनके अनुसार उनके सभी शोध पत्र ऑनलाइन निःशुल्क उपलब्ध हैं।
अमेरिका में मिला नोबेल स्तर के शोध का संकेत
अजय शर्मा ने बताया कि 1 अगस्त 2018 को उन्होंने अमेरिका के वाशिंगटन में आयोजित American Association of Physics Teachers के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने शोधपत्र की प्रस्तुति दी थी। प्रस्तुति के बाद एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी ने उनसे कहा था कि यदि न्यूटन के तीसरे नियम में उनका प्रस्तावित संशोधन प्रयोगों द्वारा सिद्ध हो जाता है, तो यह नोबेल पुरस्कार स्तर का योगदान माना जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में उन्होंने अपने निजी खर्च पर भाग लिया था क्योंकि उन्हें किसी सरकारी एजेंसी से वित्तीय सहायता नहीं मिली थी।
प्रयोगात्मक सत्यापन की आवश्यकता
अजय शर्मा का कहना है कि उनका शोध सिद्धांत (Theoretical) स्तर पर प्रकाशित हो चुका है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने के लिए प्रयोगात्मक सत्यापन (Experimental Verification) आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि प्रयोगों से उनके संशोधित सिद्धांत की पुष्टि हो जाती है तो भविष्य में इसे विश्वभर की भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री से सहयोग की अपील
सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास स्वयं की प्रयोगशाला या आवश्यक वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से अनुरोध किया है कि भारत की किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला में आवश्यक वैज्ञानिक प्रयोग करवाने में सहायता प्रदान की जाए।
उनका कहना है कि भारत मौलिक शोध (Fundamental Research) के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व स्थापित करने की क्षमता रखता है।
हिमाचल सरकार से भी समर्थन का अनुरोध
अजय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार और विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मिले प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu से आग्रह किया है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के माध्यम से इस प्रस्तावित शोध परियोजना पर विचार किया जाए।
उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश में आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आवश्यक प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उनका अनुमान है कि लगभग 20 लाख रुपये की लागत और छह महीने के भीतर इन प्रयोगों को पूरा किया जा सकता है।
न्यूटन के नियम की सीमा पर उठाया प्रश्न
अजय शर्मा का कहना है कि न्यूटन का तीसरा नियम वस्तुओं के आकार (Shape), सतह (Surface Characteristics), बनावट (Texture) और संरचना (Geometry) जैसे महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में नहीं रखता।
उनके अनुसार यदि समान द्रव्यमान वाली गोलाकार, शंक्वाकार, अर्धगोलाकार, त्रिकोणीय, सुईनुमा अथवा अनियमित आकार की वस्तुओं को किसी सतह से टकराया जाए, तो उनके उछलने (Rebound) का व्यवहार अलग-अलग होता है। उनका तर्क है कि वर्तमान नियम इन प्रभावों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं करता, जबकि उनके प्रस्तावित संशोधन में ऐसे कारकों को समाहित करने का प्रयास किया गया है।
वैज्ञानिक समुदाय करेगा अंतिम मूल्यांकन
हालांकि अजय शर्मा का शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है, लेकिन विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों में किसी भी संशोधन को व्यापक स्वीकार्यता तभी मिलती है जब स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थान और विभिन्न शोध समूह प्रयोगों के माध्यम से उसकी पुष्टि करें। इसलिए उनके प्रस्तावित संशोधन की अंतिम वैज्ञानिक मान्यता भविष्य के प्रयोगात्मक परिणामों और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय की समीक्षा पर निर्भर करेगी।
उपशीर्षक:
44 वर्षों के स्वतंत्र शोध के बाद पूर्व सहायक निदेशक शिक्षा ने रखा नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण; प्रयोगात्मक सत्यापन के लिए केंद्र और हिमाचल सरकार से सहयोग की अपील
हमीरपुर।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध क्षेत्र के निवासी एवं शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त पूर्व सहायक निदेशक अजय शर्मा ने विश्वभर में पढ़ाए जाने वाले न्यूटन के तीसरे गति नियम (Newton's Third Law of Motion) के संशोधन (Generalization) का दावा किया है। उनका शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं (रिसर्च जर्नल्स) और सम्मेलन कार्यवाहियों (Conference Proceedings) में प्रकाशित हो चुका है।
न्यूटन का तीसरा नियम कहता है कि "प्रत्येक क्रिया की बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।" अजय शर्मा का कहना है कि यह नियम केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही पूरी तरह लागू होता है। उनके अनुसार, हर स्थिति में प्रतिक्रिया का परिमाण क्रिया के बराबर होना आवश्यक नहीं है, बल्कि कई परिस्थितियों में प्रतिक्रिया केवल क्रिया के समानुपाती (Proportional) होती है।
44 वर्षों से कर रहे हैं स्वतंत्र शोध
अजय शर्मा पिछले लगभग 44 वर्षों से इस विषय पर स्वतंत्र रूप से शोध कर रहे हैं। वे मार्च 2021 में शिक्षा विभाग में पूर्व सहायक निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वे डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में भौतिकी (Physics) का अध्यापन भी कर चुके हैं।
उनका कहना है कि उनके शोध पत्रों की विशेषज्ञों द्वारा पीयर रिव्यू (Peer Review) के बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं एवं सम्मेलनों में प्रकाशित किया गया है। उनका दावा है कि उनके प्रस्तावित संशोधन से न्यूटन के लगभग 340 वर्ष पुराने सिद्धांत का विस्तार (Generalization) किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान
अजय शर्मा के अनुसार उनके शोध पत्र हाल ही में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड फिजिक्स (IUPAP) की कार्यवाही (Proceedings) में प्रकाशित हुए और उन्हें आईआईटी रोपड़ में प्रस्तुत किया गया। इससे पहले उनके शोध Elsevier द्वारा प्रकाशित Science Talks सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रकाशित हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त उनके शोध Physics Education (Indian Association of Physics Teachers), Physics Essays (Canada) तथा अन्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुए हैं। उनके अनुसार उनके सभी शोध पत्र ऑनलाइन निःशुल्क उपलब्ध हैं।
अमेरिका में मिला नोबेल स्तर के शोध का संकेत
अजय शर्मा ने बताया कि 1 अगस्त 2018 को उन्होंने अमेरिका के वाशिंगटन में आयोजित American Association of Physics Teachers के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने शोधपत्र की प्रस्तुति दी थी। प्रस्तुति के बाद एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी ने उनसे कहा था कि यदि न्यूटन के तीसरे नियम में उनका प्रस्तावित संशोधन प्रयोगों द्वारा सिद्ध हो जाता है, तो यह नोबेल पुरस्कार स्तर का योगदान माना जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में उन्होंने अपने निजी खर्च पर भाग लिया था क्योंकि उन्हें किसी सरकारी एजेंसी से वित्तीय सहायता नहीं मिली थी।
प्रयोगात्मक सत्यापन की आवश्यकता
अजय शर्मा का कहना है कि उनका शोध सिद्धांत (Theoretical) स्तर पर प्रकाशित हो चुका है, लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से स्थापित करने के लिए प्रयोगात्मक सत्यापन (Experimental Verification) आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि प्रयोगों से उनके संशोधित सिद्धांत की पुष्टि हो जाती है तो भविष्य में इसे विश्वभर की भौतिकी की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री से सहयोग की अपील
सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास स्वयं की प्रयोगशाला या आवश्यक वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से अनुरोध किया है कि भारत की किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला में आवश्यक वैज्ञानिक प्रयोग करवाने में सहायता प्रदान की जाए।
उनका कहना है कि भारत मौलिक शोध (Fundamental Research) के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व स्थापित करने की क्षमता रखता है।
हिमाचल सरकार से भी समर्थन का अनुरोध
अजय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार और विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर मिले प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu से आग्रह किया है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण विभाग के माध्यम से इस प्रस्तावित शोध परियोजना पर विचार किया जाए।
उनके अनुसार हिमाचल प्रदेश में आईआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में आवश्यक प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उनका अनुमान है कि लगभग 20 लाख रुपये की लागत और छह महीने के भीतर इन प्रयोगों को पूरा किया जा सकता है।
न्यूटन के नियम की सीमा पर उठाया प्रश्न
अजय शर्मा का कहना है कि न्यूटन का तीसरा नियम वस्तुओं के आकार (Shape), सतह (Surface Characteristics), बनावट (Texture) और संरचना (Geometry) जैसे महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में नहीं रखता।
उनके अनुसार यदि समान द्रव्यमान वाली गोलाकार, शंक्वाकार, अर्धगोलाकार, त्रिकोणीय, सुईनुमा अथवा अनियमित आकार की वस्तुओं को किसी सतह से टकराया जाए, तो उनके उछलने (Rebound) का व्यवहार अलग-अलग होता है। उनका तर्क है कि वर्तमान नियम इन प्रभावों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं करता, जबकि उनके प्रस्तावित संशोधन में ऐसे कारकों को समाहित करने का प्रयास किया गया है।
वैज्ञानिक समुदाय करेगा अंतिम मूल्यांकन
हालांकि अजय शर्मा का शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है, लेकिन विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों में किसी भी संशोधन को व्यापक स्वीकार्यता तभी मिलती है जब स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्थान और विभिन्न शोध समूह प्रयोगों के माध्यम से उसकी पुष्टि करें। इसलिए उनके प्रस्तावित संशोधन की अंतिम वैज्ञानिक मान्यता भविष्य के प्रयोगात्मक परिणामों और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय की समीक्षा पर निर्भर करेगी।
Bijender Sharma*, Press Correspondent Bohan Dehra Road JAWALAMUKHI-176031, Kangra HP(INDIA)*
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