सुक्खू सरकार का मीडिया पर शिकंजा...

सुक्खू सरकार का मीडिया पर शिकंजा...
बैवसाइट, न्यूज पोर्टल से लेकर वीकली, पाक्षिक और मासिक अखबार सबके विज्ञापन बंद समझो...
पिछले दिनों निजी काम के सिलसिले में हाईकोर्ट शिमला जाना हुआ। सत्ता परिवर्तन के बाद बनी सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में एक दो मित्रगण मंत्री बनें हैं तो हाईकोर्ट में काम निपटाने के बाद सचिवालय का रुख किया और बिना पुष्प गुच्छ दिए ही मंत्री बनें मित्रों को बधाई दें डाली। व्यवस्था परिवर्तन के दौर से गुजर रहे आर्म्सडेल के हर फ्लोर में बड़ी संख्या में फरियादी, सबको एक ही गुलदस्ता देकर फोटो खिंचवाने वाले नेता लोग, पुराने दोस्त पत्रकार भी मिले और साथ पतलकार भी खूब नजर आए। पत्रकारों की तादाद देखकर हैरानी हुई। पता चला कि कुछेक कलमनवीस तो सुबह से लेकर शाम तक मीडिया सलाहकार नरेश चौहान के कार्यकाल में ही खूंटी गाड़े बैठे रहते हैं। जब हम सरकार की रिपोर्टिंग करते थे पत्रकार एक दूसरे से छुपते छुपाते सचिवालय जाते थे ताकि एक्सक्लूसिव खबर निकाली जा सके, लेकिन आजकल वहां पत्रकार के झुंड दिखाई दे रहे हैं। पतलकारों के तो कहना ही क्या, कलम के सिपाही पत्रकार उनकी ठसक के आगे बौने नजर आते हैं।
मंत्री जी के दफ्तर के बाहर खड़े एक वरिष्ठ पत्रकार मैंने पूछा भाई आप बाहर क्यों खड़े हो ?
उन्होंने जवाब दिया 'फीलिंग द हीट' 'फीलिंग द हीट ऑफ पावर'
एक बार बोलते तो समझता कि शिमले की ठंड में भीड़ के बीच खड़े होकर गर्मी ले रहे होंगे लेकिन दो बार बोला तो माथा ठनका।
पत्रकार वाला दिमाग लगाया और खोजबीन करने पर पता चला कि सुक्खू सरकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में एक आईएएस अधिकारी को नियुक्त किया है। मैडम की नियुक्ति के बाद राजधानी के मीडिया जगत में हड़कंप मचा हुआ है। लोक सम्पर्क एंव सूचना प्रसारण विभाग में नियुक्ति करने बाद विज्ञापन के नाम पर करोड़ों की लूट में रोक लगा दी है। जानकारी है कि अधिकारी ने बैवसाइट, न्यूज बैव पोर्टल से लेकर दैनिक, वीकली, पाक्षिक और मासिक समाचार पत्रों को विज्ञापन जारी करने के लिए ठोस मानक निर्धारित कर दिए हैं और कुछेक की मान्यता रद्द कर उनकी की हवा निकाल दी है और तो और इनमें पूर्व सरकार के आईटी सैल में काम करने वाले लोगों द्वारा चलाए गए ऐसे बैव चैनलों पर भी शिकंजा कसा है जो सिर्फ और सिर्फ सरकारी विज्ञापन ऐंठने के लिए बनाए गए थे। एक नेता टाइप संपादक विज्ञापन बंद होने की खीज लेकर उनके कार्यकाल पहुंचे तो मैडम ने चाय तक नहीं पूछी। सुक्खू सरकार के इस कदम से कई नामी अखबारों के पत्रकार भी सकते में हैं जिन्होंने पिछली सरकार की चमचागिरी कर संस्थानों की मोटी रकम फंसा दी है तथा उसे निकालने के लिए सुक्खू सरकार और उनके मंत्रियों के आगे पीछे घूमकर उनकी कभी कभार प्रसारित खबरों की दुहाई देते देते केबिन तक पहुंचने में खूब पसीना बहा रहे हैं।
एक प्रतिष्ठित अखबार के ईमानदार पत्रकार ने पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि वह पिछले 15 सालों से सक्रिय पत्रकारिता में है और बामुश्किल 28 हज़ार रुपए तनख्वाह पाता है और उनसे जूनियर पतलकार अपनी बैवसाइट चला रहा है और महीने का साठ से सत्तर हजार रुपए कमा रहा है। उन्होंने बताया कि शिमला में पिछले पत्रकारिता के नाम पर सरकार को चूना लगाने की होड़ मची हुई है। कुछेक पतलकार विज्ञापन ऐंठने के साथ साथ राजनीति भी चमका रहे हैं साथ ही सचिवालय में अफसरों पर धौंस जमा कर ट्रांसफर उद्योग भी चला रहे हैं, भले ही सरकार चाहे किसी की भी हो। पूर्व सरकार के कार्यकाल में तो पत्रकारों, नेताओं और आईटी सेल के लोगों ने भी बैवसाइट या न्यूज पोर्टल बनाकर सरकार को खूब चूना लगाया है। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में करोड़ों रुपए का विज्ञापन घोटाला हुआ पड़ा है जिसमें शिमला के कई पतलकार शामिल हैं। पिछले पांच साल में जारी विज्ञापनों की निष्पक्षता से जांच हो तो कई नपेंगे।
सुक्खू सरकार अब सरकार से विज्ञापन ऐंठने वाले ऐसे पतलकारों से छुटकारा पाना चाहती है जिनका कोई सिर पैर नहीं है और न ही पाठकों के बीच को व्यूअरशिप या रीडरशिप है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि जब सरकार शिमला में होती है सचिवालय में फरियादियों से ज्यादा पतलकारों की भीड़ रहती है।
सुक्खू सरकार के इस कड़क एक्शन से सरकारी विज्ञापन हथियाने के लिए अखबार की एकाध प्रति निकालने वाले संपादकों की सांसे फूल गई हैं। राजधानी के पतलकार अब सरकार को घेरने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। विज्ञापन न मिलने पर अपने मालिकों के दवाब एक लीडिंग अखबार ने तो बकायदा डिनोटिफाइड सीरीज भी चला दी है ताकि सरकार को घेरा जा सके और सत्ता गंवाने के बाद बेसुध पड़े विपक्ष को मसाला परोसा जा सके।
सूत्रों ने बताया कि रोजाना शाम को फोबाइल पर चीख चीख कर आधी अधूरी खबरें बांचने वाले एक दो अखबारों के पक्षपाती ब्यूरो प्रमुखों से एक्रिडेशन के दम पर लिये सरकारी आवास भी लगभग छीनने वाले हैं, क्योंकि इन पतलकारों ने पूर्व सरकार में अपनी पहुंच की धौंस जमाते हुए करोंड़ों रुपए के विज्ञापन लिए थे जिनकी रकम अब फंस गई है। अखबार प्रबंधन ने इनको बकायदा डेडलाइन दे रखी है।
एक्शन में सरकार, कम से कम ग्रेजुएट हो पत्रकार:
सूत्रों की मानें तो सरकार अब सरकारी विज्ञापन लेने के लिए अब अखबारों, न्यूज पोर्टलों व बैवचैनलों को अपनी व्यूअरशिप बतानी पड़ेगी। 20 हजार व्यूअर हुए तो ही मिलेगा सरकारी विज्ञापन मिलेगा। इसी तरह दैनिक समाचार पत्रों को अपनी रोजाना बिक्री के आंकड़े सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को बताने होंगे। इतना ही नहीं सरकार द्वारा जारी किए जा रहे प्रेस नोट नियमित रूप से प्रकाशित करने होंगे। वीकली समाचार पत्रों के विज्ञापनों पर फिलहाल पूर्णतया रोक रहेगी।
सुक्खू सरकार ने फर्जी पत्रकारों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है, पत्रकारों की पहचान कर जिला जनसंपर्क कार्यालय मैं नाम पंजीबद्ध किए जाने के आदेश दिए जा रहे हैं। शैक्षणिक योग्यता कम से कम ग्रेजुएशन या मान्यता प्राप्त पत्रकारिता का डिप्लोमा के साथ पत्रकारिता का अनुभव प्रमाण लेखनी प्रमाण ही मान्य होगा उन्हें ही मान्यता दी जाएगी। अंगूठा टेक दुकानदार औ ठेकेदार टाइप पत्रकारों पर जल्द ही कार्रवाई के निर्देश दिए जायेंगे। ऐसे नियम बनाए जा रहे हैं जिसके अनुसार कोई भी अखबार मालिक किसी भी व्यक्ति को अख़बार का कार्ड जारी नहीं कर सकते जब तक कि उस समाचार पत्र के मुख्य संपादक के हस्ताक्षर पत्रकार परिचय पत्र कार्ड पर नहीं होंगे।
ताकि पैसा कमाने का जरिया न बनें पत्रकारिता:
पत्रकार हमारे देश में चौथे स्तम्भ का काम करता है जब आम जनता को न्याय के लिए कहीं न कहीं भटकना पड़ जाता है तब दुनिया कानून और सरकार को सच तक पहुंचाने का काम यह चौथा स्तम्भ ही करता है लेकिन आज कल पत्रकारिता एक पेशा बन गया है जरिया बन गया है पैसे कमाने का, लाचार मजूलम लोग जो अपनी व्यथा लेकर आते है आज कल उन से भी पैसे वसूल करने में पीछे नहीं हटते पत्रकार जिसमें छोटे न्यूज़ चैनल, बैवपोर्टल, डिजीटल न्यूज पेपर जो की यूट्यूब सोशल मीडिया से जुड़कर अपने आप को पत्रकार बता कर लोगों से मोटी रकम वसूलते हैं फिर चाहे वह विज्ञापन के नाम पर हो या शासन प्रशासन की कल्याणकारी योजनाओं की शिकायत के नाम पर, लेकिन अब ऐसे पत्रकारों पर सुक्खू सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग नकेल कसने जा रहा है अब जिले व शहर के पत्रकारों की सूची को जिला तथा सब डिवीजन स्तर पर जांच के बाद निर्देशित अधिकारियों को अपने कार्यालय पर चस्पा करना अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार अनुसार फर्जी पत्रकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के मूड़ में है। अब सही मायने के पत्रकारों की लिस्ट सबडिवीजन स्तर पर एसडीएम व पुलिस थाना पर चस्पा की जाएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सबसे अधिक शिकायत सरकारी कर्मचारी तथा अधिकारी वर्ग को है जिसमें सूचना के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए पत्रकारों द्वारा ब्लैकमेल करने एवं पत्रकारिता की आड़ में अधिकारी तथा कर्मचारियों को धमकी देकर विज्ञापन के नाम पर रूपये ऐंठे जाते हैं और रूपये नहीं देने पर प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए न्यूज पोर्टल, यूट्यूब एवं सोशल मीडिया पर गलत समाचार से अधिकारियों को मानसिक रूप से परेशान किया जाता है और जनता को भी अधकचरी जानकारी परोसी जाती है।
नोट: पत्रकार भाई इसे दिल पर न लें और पतलकार इसे गंभीरता से लें क्योंकि सरकार ले रही है


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