झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ ज्वालामुखी में चैत्र नवरात्र मेला की शुरूआत

झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ ज्वालामुखी में चैत्र नवरात्र मेला की शुरूआत
शिमला, 30 मार्च ( विजयेन्दर  शर्मा) । सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में आज झंडा चढ़ाने की रस्म के साथ चैत्र नवरात्र मेला का विधिवत शुभारंभ हो गया। स्थानीय विधायक संजय रतन व उनकी धर्मपत्नि श्रीमति रितु रतन की मौजूदगी में  मंदिर न्यास के मंदिर अधिकारी मनोहर लाल शर्मा ने मंदिर में झंडा चढ़ाया।

पुजारी पकंज शर्मा ने बताया कि यहां दर्शनों के लिये सुबह से ही बड़ी तादाद में श्रद्धालु जुटे हैं। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज रहा है। चैत्र  नवरात्र मेला के दौरान ज्वालामुखी मंदिर की आभा में चार चांद लग गये हैं । देश के विभिन्न भागों से आने वाले मां के भक्त आजकल ज्वालाजी में अपने विश्वास श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं ।

पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्वालामुखी भी शक्तिपीठ है । यहां सती की महाजिव्हा गिरी थी । इसकी पुष्टि  तंत्र चूड़ामणि से होती है । ज्वालामुख्यां महाजिहा देव उन्मत भैरवः । अर्थात ज्वालामुखी में सती की महाजिहा्र है और वहां पर भगवान शिव उन्मत भैरव रूप में स्थित हैं । ज्वालामुखी धूम्रा देवी धूमावती का स्थान है । व इसे 52 शक्तिपीठों में सर्वोच्च शक्ति सम्पन्न स्थान माना गया है । इस पवित्र स्थल में देवी ज्योति रूप में विराजमान है । तंत्र विद्या में इसे पवित्र एंव  शक्ति का प्रचण्ड स्थल माना गया है ।

शिवालिक पहाडिय़ों के आंचल में यह मंदिर स्थापित है । मंदिर  के गर्भगृह में नौ ज्योतियां जल रही हैं । इनके नाम महाकाली , अन्नपूर्णा , चण्डी, हिंगलाज , विंध्यवासिनी , महालक्ष्मी , सरस्वती , अम्बिका तथा अन्जना हैं । इनकी श्रद्घालु परिक्रमा करते हैं । विश्व में शायद यही ऐसा देवालय है जहां प्रतिमा की पूजा नहीं होती । व जल रही ज्योति ही शक्ति का साक्षात स्वरूप है।  देश -दुनिया के तीर्थ यात्रियों का यह पसंदीदा तीर्थ बन गया है ।

मन्दिर में आरती के समय बड़ा ही अदभुत नजारा देखने को मिलता है। मन्दिर में पाँच आरतियाँ की जाती हैं। पहली मंगल आरती मन्दिर के कपाट खुलते ही सुबह पाँच बजे की जाती है।इस के साथ ही दूसरी आरती और दोपहर की आरती 12 बजे की जाती है। आरती के साथ साथ माता को भोग भी लगाया जाता है। फिर शाम 7 बजे संध्या आरती की जाती है। इस के बाद देवी की शयन शैय्या को तैयार किया जाता है और उसे फूलों और सुगन्धित सामग्री से सजाया जाता है। इस के बाद रात्रि  साढ़े 9 बजे माता की शयन आरती की जाती है जिस में बड़ी संख्या में आये हुये श्रद्धालु भाग लेते हैं।

एस डी एम ज्वालामुखी डाक्टर संजीव शर्मा ने बताया की चैत्र मास नवरात्रों में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये प्रशासन ने सभी प्रबन्ध किये गये हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर  भी विशेष प्रबंध किए गये हैं,जिसके लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें अन्य सफाई कर्मियों के साथ मंदिर व शहर की सफाई का जिम्मा सौंपा गया है।

देहरा के पुलिस अधीक्षक मंयक चौधरी ने बताया कि प्रशासन की ओर से नवरात्रों के दौरान मंदिर व शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी खास प्रबंध किए गये हैं, इसके लिए शहर के विभिन्न भागों में सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गये हैं, जिनके माध्यम से सुरक्षा कर्मी दिन-रात मंदिर व शहर की सुरक्षा पर कड़ी नजर रखेंगे।

प्रशासन की ओर से नवरात्रों के दौरान मंदिर परिसर में ही यात्रियों की सुविधा के लिए  अस्थाई स्वास्थ्य शिविर की स्थापना भी की गई है , जो श्रृद्घालुओं की स्वास्थ्य संम्बधी शिकायतों का मंदिर परिसर में ही समाधान करेगा।

इस अवसर पर बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशविनी दत्त जानू, मंदिर न्यास के सदस्य , तहसीलदार राहुल व अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। 


Bijender Sharma*, Press Correspondent Bohan Dehra Road  JAWALAMUKHI-176031, Kangra HP(INDIA)*
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