बगलामुखी जयंती पर आस्था का सैलाब, श्रद्धा व उल्लास में डूबे भक्त
- पांडवों ने अज्ञातवास में एक रात में किया था मंदिर का निर्माण
देहरा (कांगड़ा): बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर जिला कांगड़ा के बनखंडी स्थित प्रसिद्ध माता बगलामुखी मंदिर में आज हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की। वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। जयकारों और भक्ति-गीतों के बीच श्रद्धालु मां की महिमा का गुणगान करते नजर आए, वहीं लगातार हवन-यज्ञ का आयोजन भी चलता रहा।
रानीताल-ऊना-चंडीगढ़ राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर देहरा के समीप स्थित इस मंदिर में हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस दिन विशेष अनुष्ठान कराने का खास महत्व माना जाता है।
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी मनोहर लाल के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान एक ही रात में की गई थी। मान्यता है कि अर्जुन और भीम ने यहां युद्ध में विजय और शक्ति प्राप्ति के लिए माता बगलामुखी की विशेष पूजा की थी। तभी से यह मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि सालभर श्री ज्वालामुखी, माता चिंतपूर्णी और नगरकोट आने वाले श्रद्धालु यहां भी दर्शन के लिए अवश्य पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन शिवालय में स्थापित विशाल शिवलिंग पर भी भक्त अभिषेक करते हैं।
मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। लंगर, पेयजल, शौचालय, ठहरने की सुविधा और हवन-पूजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
पंडित दिनेश रत्न ने बताया कि माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवें स्थान पर विराजमान हैं और उनकी उपासना विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु, परशुराम सहित कई महायोद्धाओं ने माता की आराधना कर विजय प्राप्त की।
उन्होंने यह भी बताया कि बनखंडी स्थित यह मंदिर देश के दो प्रमुख सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फल देती है।
वैशाख शुक्ल अष्टमी को माता बगलामुखी का अवतरण दिवस माना जाता है, जिसे बगलामुखी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत, पूजा-अर्चना, भजन संध्या, महायज्ञ और रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है। मां बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री माना जाता है, जो अपने भक्तों के भय को दूर कर शत्रुओं का नाश करती हैं। इन्हें ‘पीताम्बरा’ नाम से भी जाना जाता है।