ऑरगैनिक क्षेत्र में भेड़ पालन व्यवसाय का है विशेष योगदान: त्रिलोक कपूर
कहा.......समुदाय के कल्याण के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध।
देहरा में भेड़ पालकों के लिए प्रशिक्षण एवम जागरूकता शिविर आयोजित.......बाँटी मेडिकल किटें।
देहरा 16 फरवरी: ( विजयेन्दर शर्मा) । जनजातीय विकास विभाग के सौजन्य से प्रदेश वूल फेडरेशन तथा पशु पालन विभाग द्वारा आज देहरा के लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह में "सरकार भेड़ पालकों के द्वार" कार्यक्रम के तहत भेड़ पालकों के लिये एक दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश वूल फ़ेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इस शिविर में लगभग 300 घुमन्तू भेड़ पालकों ने भाग लिया।
त्रिलोक कपूर ने कहा कि प्रदेश सरकार भेड़ पालकों की सच्ची हितैषी है तथा इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के हितों तथा समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ग के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गईं हैं। उन्होंने बताया कि इस समुदाय ने अपने पुश्तैनी व्यवसाय से प्रदेश को एक अलग पहचान दिलायी है। इस पहचान को बनाए रखने के लिए भेड़ पालन व्यवसाय को लुप्त होने से बचाए रखना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में ऑरगैनिक वस्तुओं की माँग बहुत तेज़ी से बड़ रही है तथा भेड़ पालकों द्वारा उत्पादित सभी वस्तुएँ पूर्णतः ऑरगैनिक होती हैं। उन्होंने कहा कि भेड़ पालक ऑरगैनिक क्षेत्र में विशेष योगदान देते हुए अभी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि घुमंतू भेड़ पालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी सुविधा के लिए विश्व बैंक के सहयोग से विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। जिसके तहत उन्हें टेंट, स्लीपिंग बैग मुहैया करवाने के साथ उनके पैदल रास्तों को डिजिटलाईज बनाने के लिए मैपिंग सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि किसी भी इमरजेंसी के समय में उनके साथ संपर्क किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस व्यवसाय में चरागाह सम्बंधी आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई कारगर कदम उठाए हैं। भेड़ पालकों की चरागाह की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा परमिट जारी करने की अवधि को तीन वर्ष से बढ़ा कर 6 वर्ष किया गया है। जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एवं वन मंत्री राकेश पठानिया का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार भेड़ पालकों की हर समस्या के समाधान के प्रति गंभीर है। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार पिछले कई वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़ा रहा है। इसलिए वह व्यक्तिगत रूप से इस समुदाय के लोगों का दर्द समझते हैं।
त्रिलोक कपूर ने बताया कि जब-जब उन्हें वूल फेडरेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने इस वर्ग को पहचान दिलाने के साथ उनके कल्याण के लिए हर मंच पर उनसे जुड़ी समस्याओं को उठाने सहित उन्हें हल करवाने का प्रयास किया है। जिससे इस वर्ग में अपने व्यवसाय के प्रति उत्साह व जोश पैदा हुआ है।
त्रिलोक कपूर ने बताया कि नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत लगभग 8 करोड़ रुपए की योजना के तहत आस्ट्रेलियन मरीनो किस्म के 250 भेड़ ओर मेढ़े फार्म में मंगवाए गए है। आने वाले समय में इनकी नस्ल तैयार करके भेड़ पालकों को वितरित की जाएगी।
शिविर में भेड़ पालकों को इमरजेंसी के दौरान भेड़-बकरियों के लिए दी जाने वाली दवाईयों की किटें व एक-एक सोलर टॉर्च भी वितरित की।
इससे पहले, पशु पालन विभाग के उपनिदेशक डॉ संजीव धीमान ने शिविर में आए हुए सभी भेड़ पालकों का स्वागत किया व उन्हें विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं बारे जानकारी दी।
इस मौके पर पशु चिकित्सकों द्वारा भेड़ पालकों को भेड़-बकरियों की विभिन्न बीमारियों व उनके उपचार बारे भी जानकारी प्रदान की गई।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर वन निगम के निदेशक नरेश चौहान, पशु पालन विभाग के उपनिदेशक डॉ संजीव धीमान, भेड़ प्रजजन फार्म ताल (हमीरपुर) के सहायक डॉ मुंशी राम कपूर, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी देहरा डॉ गुलशन कुमार, मंडल अध्यक्ष निर्मल सिंह, ज़िला महामंत्री अभिषेक पाधा, मालकियत परमार, पशुपालन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी व भेड़ पालक उपस्थित रहे।
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