बजट में आऊटसोर्स के लिए नीति निर्धारित होनी चाहिए थी, मुख्यमंत्री ने जनता को किया निराश : हर्ष महाजन
शिमला, भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि हिमाचल का बजट प्रदेश की जनता के लिए एक बिछाया हुआ आंकड़ों का मायाजाल है। हिमाचल का बजट पूरी तरह से खोखला एवं ठन ठन गोपाल है, मुख्यमंत्री ने वादे बड़े बड़े किया पर आम जनता के हाथ पूरी तरह से खाली रखे। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में केवल जनता और प्रदेश पर बोझ बढ़ने का काम किया।
महाजन ने कहा कि आऊटसोर्स के लिए नीति निर्धारित होनी चाहिए, बजट में दिहाड़ीदारों, आऊटसोर्स वर्कर, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर, व अन्य कई कर्मियों की पगार बढाना कर्मचारी को लॉलीपॉप देना जैसा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है आऊटसोर्स कर्मियों को नियमित करने के लिए नीति-निर्धारण करना। कर्मचारियों को 3 फीसदी डी.ए. और 70 वर्ष से ऊपर के पैशनरों को अस्थिर के भुगतान की घोषणा में भी कई खामियां है पुराने डी.ए की बात बजट में रखी ही नहीं गई। परन्तु देनदारियों को निपटाने में इस तरह जो कई दशक लग जाएंगे जो न कर्मचारियों के और न ही सरकार के हित में होगा। न्यायालयों ने अगर एरियर पर ब्याज देने को बाध्य किया तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।
महाजन ने कहा कि प्रदेश को शिक्षा और स्वास्थ्य में और सुधार की जरूरत है, शिक्षा को गुणवत्ता परविशेषध्यान देने की आवश्यकता है। स्कूलों में बढ़ती नशा प्रवृति पर भी अंकुश की सख्त जरुरत है। चिकित्सा सस्थानो में एम आर.आई. और पैट स्कैन आदि नए उपकरण खरीदना समय की मांग है। इसी के साथ साथ बेसहारा बैल-गायों की समस्या के समाधान के लिए कुछ विशेष नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का वर्ष, 2025-26 के बजट से पहले गत 13 मार्च को प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण सामने आया था। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार आर्थिक गति दर में 0.1 फीसदी की मामूली सी बढ़ौतरी हुई है।
महाजन ने कहा कि बजट में 6,390 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित है। राजस्व घाटे के साथ करीब 10,338 करोड़ रुपए के पूंजीगत घाटा अनुमानित है। बजट अनुमानों के अनुसार आगामी वर्ष में प्रदेश सरकार की राजस्व प्राप्तियां 42,343 करोड़ रुपए तथा राजस्व खर्च 48,733 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इससे हिमाचल प्रदेश में चल रहा वित्तीय संकट और गंभीर हो जाएगा।
शिमला, भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि हिमाचल का बजट प्रदेश की जनता के लिए एक बिछाया हुआ आंकड़ों का मायाजाल है। हिमाचल का बजट पूरी तरह से खोखला एवं ठन ठन गोपाल है, मुख्यमंत्री ने वादे बड़े बड़े किया पर आम जनता के हाथ पूरी तरह से खाली रखे। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में केवल जनता और प्रदेश पर बोझ बढ़ने का काम किया।
महाजन ने कहा कि आऊटसोर्स के लिए नीति निर्धारित होनी चाहिए, बजट में दिहाड़ीदारों, आऊटसोर्स वर्कर, आंगनबाड़ी व आशा वर्कर, व अन्य कई कर्मियों की पगार बढाना कर्मचारी को लॉलीपॉप देना जैसा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण है आऊटसोर्स कर्मियों को नियमित करने के लिए नीति-निर्धारण करना। कर्मचारियों को 3 फीसदी डी.ए. और 70 वर्ष से ऊपर के पैशनरों को अस्थिर के भुगतान की घोषणा में भी कई खामियां है पुराने डी.ए की बात बजट में रखी ही नहीं गई। परन्तु देनदारियों को निपटाने में इस तरह जो कई दशक लग जाएंगे जो न कर्मचारियों के और न ही सरकार के हित में होगा। न्यायालयों ने अगर एरियर पर ब्याज देने को बाध्य किया तो मुश्किल और बढ़ जाएगी।
महाजन ने कहा कि प्रदेश को शिक्षा और स्वास्थ्य में और सुधार की जरूरत है, शिक्षा को गुणवत्ता परविशेषध्यान देने की आवश्यकता है। स्कूलों में बढ़ती नशा प्रवृति पर भी अंकुश की सख्त जरुरत है। चिकित्सा सस्थानो में एम आर.आई. और पैट स्कैन आदि नए उपकरण खरीदना समय की मांग है। इसी के साथ साथ बेसहारा बैल-गायों की समस्या के समाधान के लिए कुछ विशेष नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का वर्ष, 2025-26 के बजट से पहले गत 13 मार्च को प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण सामने आया था। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार आर्थिक गति दर में 0.1 फीसदी की मामूली सी बढ़ौतरी हुई है।
महाजन ने कहा कि बजट में 6,390 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा अनुमानित है। राजस्व घाटे के साथ करीब 10,338 करोड़ रुपए के पूंजीगत घाटा अनुमानित है। बजट अनुमानों के अनुसार आगामी वर्ष में प्रदेश सरकार की राजस्व प्राप्तियां 42,343 करोड़ रुपए तथा राजस्व खर्च 48,733 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इससे हिमाचल प्रदेश में चल रहा वित्तीय संकट और गंभीर हो जाएगा।
Bijender Sharma*, Press Correspondent Bohan Dehra Road JAWALAMUKHI-176031, Kangra HP(INDIA)*
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