कर-कर्ज़, भ्रष्टाचार संरक्षण और मित्रों का भरण-पोषण ही है सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन : जयराम ठाकुर
बार-बार झूट बोलकर समय निकालने की पॉलिसी पर चल रही है सुख की सरकार
व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार मित्रों की, मित्रों द्वारा मित्रों के लिए मित्र मंडल वाली सरकार है
मंडी : प्रदेश की वर्तमान सरकार ने “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर जो मॉडल प्रस्तुत किया है, वह वास्तव में करों का बोझ बढ़ाने, कर्ज़ में डुबाने, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने का मॉडल बनकर रह गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश को ऐसा नेतृत्व मिला है जिसकी कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर है जिसके कारण आज प्रदेश के लोग सीएम पर भरोसा ही नहीं कर रहे हैं। जनता से किए गए वादों को निभाने के बजाय सरकार झूठी गारंटियों का सहारा लेकर लोगों को गुमराह करती रही है।
सहारा योजना जैसी महत्वपूर्ण पेंशन को बंद करने के लिए गरीब और असहाय लोगों को कागज़ों में ही मृत दिखाने जैसी अमानवीय कोशिशें की जा रही हैं। हिमकेयर जैसी जनकल्याणकारी योजना को बदनाम कर बंद करने की साजिश रची जा रही है, जिससे प्रदेश की गरीब जनता का स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र कमजोर हुआ है। आज लोगों के इलाज से भटकने, इलाज दवाई न मिलने की खबरें आम हो गई हैं। इस सरकार ने एक इंजेक्शन के लिए बेटी के सर से पिता का साया छीन लिया। मंगलसूत्र बिकवा दिया, माँ के जेवर गिरवी रखवा दिए।
सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री की सिस्टम से पकड़ कमजोर होती जा रही है। भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के सामने वह नतमस्तक हैं। कंप्रोमाइज्ड हैं। प्रदेश में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और सरकार ने इस पर आंख, कान और नाक बंद कर रखे हैं। बड़े घोटालों में कार्रवाई के बजाय लीपापोती की जा रही है। जब सरकार खुद अपने बयानों में उलझती दिखे, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश हो रही है। अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे यह संदेह और गहरा होता है कि भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
प्रदेश में ऐसा पहली बार हुए हैं जब मित्र मंडल मंत्रिमंडल पर हावी है। सरकार ने मित्रों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए पदों का बंटवारा किया है। सलाहकारों की फौज खड़ी कर उन्हें कैबिनेट रैंक और भारी-भरकम सुविधाएं दी जा रही हैं, लोकतंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन होता है लेकिन व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार मित्रों की, मित्रों द्वारा मित्रों के लिए मित्र मंडल वाली सरकार बन गई है।
निगमों और बोर्डों में भी इसी प्रकार नियुक्तियां कर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया है। यह सरकार लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। जनता की सरकार होने के बजाय यह “मित्र मंडली की सरकार” बनकर रह गई है, जहां फैसले जनता के हित में नहीं, बल्कि निजी हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं।
पंचायत चुनाव जैसे संवैधानिक विषय पर बार-बार गलत निर्णय लेकर सरकार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक उड़ाया है। न्यायालय से बार-बार फटकार मिलने के बावजूद सरकार ने अपनी गलतियों से सीखने के बजाय करोड़ों रुपये जनता के पैसे से कानूनी लड़ाइयों में झोंक दिए। यह सीधा-सीधा जनता के धन का दुरुपयोग है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय जनता पर टैक्स का बोझ डालना आसान रास्ता चुना है। डीजल पर बार-बार वैट बढ़ाया गया, नए-नए सेस लगाए गए, अस्पतालों में फीस बढ़ाई गई और हर प्रकार की सरकारी सेवाओं को महंगा किया गया। परिणामस्वरूप महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
कर्ज़ का आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। हर महीने भारी कर्ज़ लेकर सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रही सके बावजूद विकास कार्य ठप पड़े हैं। हजारों संस्थान बंद कर दिए गए, रोजगार के अवसर घटे और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। नौकरी देने के वादे करने वाली सरकार ने नौकरियां देने के बजाय रोजगार के अवसर ही समाप्त कर दिए।
औद्योगिक विकास पूरी तरह ठप हो गया है। बिजली दरों में वृद्धि और नीतिगत अस्थिरता के कारण उद्योग प्रदेश छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, वह भी सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रभावित हुआ है। प्रस्तावित परियोजनाओं को रोक दिया गया और पर्यटन को बढ़ावा देने के बजाय उस पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया।
बार-बार झूट बोलकर समय निकालने की पॉलिसी पर चल रही है सुख की सरकार
व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार मित्रों की, मित्रों द्वारा मित्रों के लिए मित्र मंडल वाली सरकार है
मंडी : प्रदेश की वर्तमान सरकार ने “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर जो मॉडल प्रस्तुत किया है, वह वास्तव में करों का बोझ बढ़ाने, कर्ज़ में डुबाने, भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और अपने मित्रों को लाभ पहुंचाने का मॉडल बनकर रह गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश को ऐसा नेतृत्व मिला है जिसकी कथनी और करनी में ज़मीन आसमान का अंतर है जिसके कारण आज प्रदेश के लोग सीएम पर भरोसा ही नहीं कर रहे हैं। जनता से किए गए वादों को निभाने के बजाय सरकार झूठी गारंटियों का सहारा लेकर लोगों को गुमराह करती रही है।
सहारा योजना जैसी महत्वपूर्ण पेंशन को बंद करने के लिए गरीब और असहाय लोगों को कागज़ों में ही मृत दिखाने जैसी अमानवीय कोशिशें की जा रही हैं। हिमकेयर जैसी जनकल्याणकारी योजना को बदनाम कर बंद करने की साजिश रची जा रही है, जिससे प्रदेश की गरीब जनता का स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र कमजोर हुआ है। आज लोगों के इलाज से भटकने, इलाज दवाई न मिलने की खबरें आम हो गई हैं। इस सरकार ने एक इंजेक्शन के लिए बेटी के सर से पिता का साया छीन लिया। मंगलसूत्र बिकवा दिया, माँ के जेवर गिरवी रखवा दिए।
सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री की सिस्टम से पकड़ कमजोर होती जा रही है। भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों के सामने वह नतमस्तक हैं। कंप्रोमाइज्ड हैं। प्रदेश में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और सरकार ने इस पर आंख, कान और नाक बंद कर रखे हैं। बड़े घोटालों में कार्रवाई के बजाय लीपापोती की जा रही है। जब सरकार खुद अपने बयानों में उलझती दिखे, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश हो रही है। अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को भटकाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे यह संदेह और गहरा होता है कि भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
प्रदेश में ऐसा पहली बार हुए हैं जब मित्र मंडल मंत्रिमंडल पर हावी है। सरकार ने मित्रों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए पदों का बंटवारा किया है। सलाहकारों की फौज खड़ी कर उन्हें कैबिनेट रैंक और भारी-भरकम सुविधाएं दी जा रही हैं, लोकतंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन होता है लेकिन व्यवस्था परिवर्तन वाली सुक्खू सरकार मित्रों की, मित्रों द्वारा मित्रों के लिए मित्र मंडल वाली सरकार बन गई है।
निगमों और बोर्डों में भी इसी प्रकार नियुक्तियां कर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया है। यह सरकार लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। जनता की सरकार होने के बजाय यह “मित्र मंडली की सरकार” बनकर रह गई है, जहां फैसले जनता के हित में नहीं, बल्कि निजी हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं।
पंचायत चुनाव जैसे संवैधानिक विषय पर बार-बार गलत निर्णय लेकर सरकार ने लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक उड़ाया है। न्यायालय से बार-बार फटकार मिलने के बावजूद सरकार ने अपनी गलतियों से सीखने के बजाय करोड़ों रुपये जनता के पैसे से कानूनी लड़ाइयों में झोंक दिए। यह सीधा-सीधा जनता के धन का दुरुपयोग है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय जनता पर टैक्स का बोझ डालना आसान रास्ता चुना है। डीजल पर बार-बार वैट बढ़ाया गया, नए-नए सेस लगाए गए, अस्पतालों में फीस बढ़ाई गई और हर प्रकार की सरकारी सेवाओं को महंगा किया गया। परिणामस्वरूप महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
कर्ज़ का आंकड़ा ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। हर महीने भारी कर्ज़ लेकर सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रही सके बावजूद विकास कार्य ठप पड़े हैं। हजारों संस्थान बंद कर दिए गए, रोजगार के अवसर घटे और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। नौकरी देने के वादे करने वाली सरकार ने नौकरियां देने के बजाय रोजगार के अवसर ही समाप्त कर दिए।
औद्योगिक विकास पूरी तरह ठप हो गया है। बिजली दरों में वृद्धि और नीतिगत अस्थिरता के कारण उद्योग प्रदेश छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। पर्यटन क्षेत्र, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, वह भी सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रभावित हुआ है। प्रस्तावित परियोजनाओं को रोक दिया गया और पर्यटन को बढ़ावा देने के बजाय उस पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया।
Bijender Sharma*, Press Correspondent Bohan Dehra Road JAWALAMUKHI-176031, Kangra HP(INDIA)*
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